22 प्रतिज्ञा दिवस व बौद्ध धम्म दीक्षा दिवस पर समता सैनिकों ने किया फल वितरण
सैय्यद जाहिद अली रियासत

मुंबई@nirbhaypathik : भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की ऐतिहासिक धम्म क्रांति के 70 वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समन्वय समिति की ओर से दादर स्थित पवित्र चैत्यभूमि परिसर में विशेष अभिवादन कार्यक्रम उत्साहपूर्ण और मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम की शुरुआत तथागत भगवान गौतम बुद्ध और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को विनम्र अभिवादन के साथ की गई। इस अवसर पर सामूहिक बुद्ध वंदना, त्रिशरण-पंचशील ग्रहण किया गया। साथ ही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा 14अक्टूबर 1956 को दी गई ऐतिहासिक 22 प्रतिज्ञाओं का सामूहिक वाचन कर उपस्थित लोगों ने समता, बंधुता, स्वतंत्रता, न्याय और मानवतावादी मूल्यों के पालन का संकल्प लिया।इस अवसर पर भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से प्रदीप कांबळे विशेष रूप से उपस्थित थे।साथ ही योगेश देसाई, सहायक आयुक्त तथा वार्ड अधिकारी, बृहन्मुंबई महानगरपालिका, जी/उत्तर विभाग, दादर और प्रवीण तेजाळे, सहायक पुलिस आयुक्त, दादर विभाग, मुंबई के हाथों चैत्यभूमि में समता सैनिक दल के जवानों को फलों का वितरण किया गया।
समता सैनिक दल के जवान चैत्यभूमि परिसर में अनुशासन, सुव्यवस्था और सामाजिक प्रतिबद्धता बनाए रखने के लिए जो योगदान दे रहे हैं, इस उपक्रम के माध्यम से उनका सम्मान किया गया।
इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और पदाधिकारी :
प्रवीण तेजाळे – सहायक पुलिस आयुक्त, योगेश देसाई – जी/उत्तर विभाग केसहायक आयुक्त तथा वार्ड अधिकारी,धैर्यशील पवार – जी/उत्तर विभाग, प्रदीप कांबळे ( भारतीय बौद्ध महासभा ),नागसेन कांबळे – महासचिव, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समन्वय समिति ,सदानंद मोहिते – सह-सचिव, समन्वय समिति ,संजय रमेश भालेराव , श्रीकांत भिसे – वरिष्ठ नेता ,सुशांत रुके,सिताराम पवार ,राहुल जाधव ,अश्विन वाघ गौतम दोंदे सहित
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समन्वय समिति के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, समता सैनिक दल के जवान तथा बौद्ध अनुयायी उपस्थित थे.
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि पर लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर भारत में ऐतिहासिक सामाजिक और वैचारिक परिवर्तन किया। उनकी यह धम्म क्रांति केवल धार्मिक परिवर्तन नहीं, बल्कि मानवीय स्वाभिमान, सामाजिक समता, बंधुता और न्याय पर आधारित नवसमाज निर्माण का आंदोलन था।
इस ऐतिहासिक धम्म क्रांति की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की २२ प्रतिज्ञाओं के महत्व को समाज में स्थापित करना और तथागत बुद्ध के प्रज्ञा, शील, करुणा और मैत्री के विचारों का प्रचार-प्रसार करना, इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य था।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के हाथों समता सैनिक दल के जवानों को फलों का वितरण किया गया। सभी उपस्थित लोगों के सहयोग और उत्स्फूर्त सहभागिता से चैत्यभूमि में यह अभिवादन समारोह शांतिपूर्ण, अनुशासित और उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।