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भौंक रहा है आज कल, फिर कीर्ती आजाद
ममता के पग चाटकर, भूल रहा मरजाद
भूल रहा मरजाद,अरे खल कुटिल दोगले
भला सनातन धर्म से अधम यार क्यों जले
कह सुरेश कविराय अरे खल को समझाओ
हे बजरंगबली तुम ही इसको लतियाओ
सुरेश मिश्र