सोसाइटी के पुनर्विकास में डेवलपर चुनने के लिए रजिस्ट्रार की मौजूदगी ज़रूरी
मुंबई,@nirbhaypathik: : कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर अब कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट की कड़ी नज़र रहेगी। डेवलपर चुनने की प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रार ऑफ़ कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ के अधिकृत अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने 30 सितंबर को जारी एक सरकारी आदेश के ज़रिए कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के रीडेवलपमेंट की प्रक्रिया में बदलाव किया है। इस नए नियम का मकसद प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, खासकर डेवलपर की नियुक्ति के चरण में।
नई प्रक्रिया के तहत, जब कोई सोसाइटी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर लेती है और डेवलपर्स से बोलियां प्राप्त कर लेती है, तो डेवलपर को चुनने के लिए एक स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग बुलानी होगी। इस मीटिंग का प्रस्ताव, मीटिंग के नोटिस, सदस्यों की सूची, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, टेंडर और बोलियों के तुलनात्मक विवरण के साथ रजिस्ट्रार को सौंपना होगा।
डेवलपर के चयन के लिए बुलाई गई विशेष सर्व साधारण सभा में रजिस्ट्रार के अधिकृत अधिकारी का मौजूद रहना ज़रूरी होगा। अधिकारी कार्यवाही की देखरेख करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि तय प्रक्रिया का पालन किया जाए। संबंधित दस्तावेज़ मिलने के 14 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को प्रस्ताव पर निर्णय लेना होगा।
महाराष्ट्र सोसाइटीज़ वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन रमेश प्रभु ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकार के पिछले आदेश केवल निर्देश थे, अनिवार्य नहीं। हालांकि रजिस्ट्रार के प्रतिनिधि की मौजूदगी का नियम था, लेकिन जो सोसायटियां अधिकारी को नहीं बुलाती थीं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी। उन्होंने कहा, “हालांकि, लगभग 10 साल बाद जारी नया सरकारी प्रस्ताव नियमों का पालन अनिवार्य बनाता है और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान करता है। साथ ही, रजिस्ट्रार को ऐसी शक्तियां देने से रजिस्ट्रार के कार्यालय पर कानूनी मामलों का बोझ भी बढ़ सकता है।”
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