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गौरी सुत, गणपति,अमित, एकदंत, अवनीश
भालचंद,एकाक्षर,हरिए मन की टीस
हरिए मन की टीस, शीश तव द्वार झुकाएं
बल,बुधि, विद्या,भीम,आज सब पर बरसाएं
कह सुरेश कविराय गहो भक्तों की डोरी
भक्तों को दो प्यार, तुम्हें दें जैसे गौरी
सुरेश मिश्र