199
खरी-खरी
मानस पर छेड़ा गया, जबरन व्यर्थ विवाद।
सोच समझकर कीजिए, शब्दों का अनुवाद।।
शब्दों का अनुवाद, लिख गये तुलसी बाबा।
जो समाज को तोड़े, मत करिए वह दावा।।
शबरी के थे राम, जानता यह जनमानस।
है विवाद से रहित, अमर तुलसी का मानस।।
•अशोक वशिष्ठ